Skip to main content

पसंद




Comments

Popular posts from this blog

"फेंक जहां तक भाला जाए" - वाहिद अली वाहिद द्वारा रचित

कब तक बोझ संभाला जाए द्वंद्व कहां तक पाला जाए दूध छीन बच्चों के मुख से  क्यों नागों को पाला जाए दोनों ओर लिखा हो भारत  सिक्का वही उछाला जाए तू भी है राणा का वंशज  फेंक जहां तक भाला जाए  इस बिगड़ैल पड़ोसी को तो  फिर शीशे में ढाला जाए  तेरे मेरे दिल पर ताला  राम करें ये ताला जाए  वाहिद के घर दीप जले तो  मंदिर तलक उजाला जाए कब तक बोझ संभाला जाए युद्ध कहां तक टाला जाए  तू भी है राणा का वंशज  फेंक जहां तक भाला जाए - वाहिद अली वाहिद

समय के साथ दम तोड़ती दोस्ती!

जिंदगी में कुछ पाने की ख्वाहिश में अक्सर हम कुछ ना कुछ खो देते हैं..  कोई रातों की नींद खोता है.. तो कोई सुबह की चैन खो देता है। दोस्त- यार तो शायद मिलते ही हैं बिछड़ने के लिए.. एक शहर से दूसरे शहर चले जाओ.. नए लोग मिलते हैं, व्यस्तता बढ़ती है... तो उस पुराने शहर के दोस्त काफी पीछे छूट जाते हैं। उम्र के साथ समझ और जिंदगी संवारने का दबाव दोनों बढ़ता जाता है.. ऐसे में चंद जरूरत के लोग याद आते हैं बाकी सब किस्से बनकर रह जाते हैं.. हमें उन दोस्तों के साथ बिताए लम्हों को भी याद करने का समय नहीं होता.. शायद जिंदगी इतनी व्यस्त चल रही होती है या फिर हम समझ चुके होते हैं, अब उनका हमारी जिंदगी में कोई अहमियत नहीं। उनकी जरूरत भला क्यूं हो.. हमारे नए दोस्त तो हैं.. जिनके साथ हम आज भी वही मस्ती करते हैं, जैसा उन पुराने शहर वाले दोस्तों के साथ करते थे। खुद का अपने किसी करीबी से इग्नोर होना सब को बुरा लगता है.. लेकिन क्या करें, जिंदगी है साहब! कभी-कभी तो हम इग्नोर भी कर जाते हैं अपने उन पुराने दोस्तों को, आभासी या वास्तविक रूप से सामने दिखने पर.. शायद.. जिंदगी में हमारी कुछ उथल-पुथल चल...

कदम मिला कर चलना होगा - स्मृतिशेष अटल बिहारी बाजपेई जी

बाधाएँ आती हैं आएँ,  घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,  पाँवों के नीचे अंगारे,  सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,  निज हाथों से हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।  हास्य-रुदन में, तूफानों में,  अमर असंख्यक बलिदानों में,  उद्यानों में, वीरानों में,  अपमानों में, सम्मानों में  उन्नत मस्तक, उभरा सीना,  पीड़ाओं में पलना होगा!  कदम मिलाकर चलना होगा।  उजियारे में, अंधकार में, कल कछार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में,  क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,  जीवन के शत-शत आकर्षक,  अरमानों को दलना होगा।  कदम मिलाकर चलना होगा। सम्मुख फैला अमर ध्येय-पथ,  प्रगति चिरंतन कैसा इति-अथ,   सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,  असफल, सफल समान मनोरथ,  सबकुछ देकर कुछ न माँगते,  पावस बनकर ढलना होगा।  कदम मिलाकर चलना होगा।  कुश-काँटों से सज्जित जीवन,  प्रखर प्यार से वंचित यौवन,  नीरवता से मुखरित मधुवन,  पर-हित अर्पित अपना तन-मन,  जीवन को शत-शत आहुति में,  जलना ह...