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मन नहीं है



आंखों में उसके वो काजल वही है
मगर उसकी पलकें तो अब नम नहीं है
जुल्फें में उसकी अदाएं वही हैं
मगर उस अदा में वो सरगम नहीं है
होठों पे उसके वो रंगत वही है
मगर उन लबों पर अब मरहम नहीं है
नज़रों में उसके इशारे वही हैं
मगर उन निगाहों में अब गम नहीं हैं
हम तो हैं बागी अब खुश तो वही है
मगर उस तमाशे में अब हम नहीं हैं
दिल में हो कुछ भी पर दूरी वही है
छोड़ो ना यार अब मन नहीं है

© रक्तफूल

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