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विजय पताका तुम फहराओ!



धड़कन से बात करो तुम अपनी
स्वप्न सुनहरे उसे दिखाओ
आवाज़ लगाओ आस को अपनी
नई चेतना पुनः जगाओ

सांसों को अपनी धैर्य दिखाओ
पल दो पल का विश्राम करो
नई योजना पुनः बनाओ
तब उस पर अनुसंधान करो

संघर्षों को तुम बाण बनाओ
दुर्बलता पर संधान करो
पूर्व विजय का साक्ष्य दिखाओ
तब उस पर अभिमान करो

छोड़ो कल के खेल खिलौने
नए अस्त्र तुम स्वयं बनाओ
जो तुम तक आई भाला बन
उस विपदा को तीर बनाओ

भूल गए जो आग तुम्हारी
अपने रिपु को तुम याद दिलाओ
किसमें शक्ति तुम्हें ललकारे 
जाओ उससे आंख लड़ाओ

जो भी बाधा मिले मार्ग में
उसको सहर्ष तुम गले लगाओ
जो बोले थे हार गया ये
उनको बल का परिचय करवाओ

जो गढ़ छल कर छीना था तुमसे
उस पर अब तुम सेंध लगाओ
सत्ता उलट पलट तुम कर दो
विजय पताका तुम फहराओ


लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि
मर्यादा तुम भूल ही जाओ
याद रखो तुम कल भी अपना
नीति धर्म से राज चलाओ

- सत्यम
    

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