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आज मिलें क्या



आज मिलें क्या
अन ख्वाबों में जहां रोज़ तुम आती थी
हंसाती थी मुझको, थोड़ा झूठा ही रुलाती थी
क्यूंकि आज मुझे तुमको फिर से देखना है
तुम्हारे साथ बिताए लम्हों को फिर से संजोना है
तुम भी मुझे देख लेना, इतने बुरे तो नहीं हम
तेरा हर फैसला मानने को तैयार भी हैं हम
मैं चाह लूंगा तो दुनिया मुझे रोकेगी क्या
लेकिन मैं तुमसे पूछता हूं, उन सपनों में फिर
आज मिलें क्या

© रक्तफूल

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